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चीन अमेरिका को खनिजों का निर्यात घटा रक्षा विनिर्माताओं पर साध रहा निशाना- रिपोर्ट

चीन उन दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर अंकुश लगाने के तरीके तलाश रहा है, जो परिष्कृत हथियार और एफ-35 लड़ाकू जेट के निर्माण के लिए लॉकहीड मार्टिन कॉर्प जैसे अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एफटी ने एक चीनी सरकार के सलाहकार के हवाले से बताया, “सरकार यह जानना चाहती है कि अगर चीन निर्यात प्रतिबंध लगाता है तो अमेरिका को एफ-35 लड़ाकू विमान बनाने में परेशानी हो सकती है।”

यह तत्व दुर्लभ 17 खनिजों से बने होते हैं। इसे रक्षा उद्योगों में मिसाइलों व युद्ध सामग्रियों के निर्माण, हाइपर सोनिक हथियारों और विकिरण कठोर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले मोबाइल फोन के निर्माण लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

दुर्लभ खनिजों में इटर्बीअम (टीवी, कंप्यूटर स्क्रीन और कैंसर की दवाओं में प्रयुक्त होता) और प्रैजियोडिमियम (मैग्नेट में प्रयुक्त और विमान इंजन के लिए धातु को मजबूत करने के लिए) शामिल हैं।

वर्तमान में अमेरिका चीन से सीधे खनिजों का 80 प्रतिशत आयात करता है। शेष हिस्से अन्य देशों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चीन से आते हैं। उदाहरण के लिए चीन दुनिया की लिथियम आयन बैटरी का लगभग दो-तिहाई उत्पादन करता है और अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से महत्वपूर्ण धातुओं को सुरक्षित करने के लिए जटिल आपूर्ति लिंक लिंकेज का निर्माण करता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और राष्ट्रीय रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों पर चीन की पकड़ को तोड़ने के प्रयास में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गत वर्ष खनन उद्योग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य निर्भरता को कम कर सैन्य और इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधित तकनीकों के लिए दुर्लभ खनिजों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना था।