समाचार
चीन समर्थित ऋण कंपनियों पर धोखाधड़ी मामले में ईडी और सीआईडी ने शुरू की जाँच

भारत में चीन समर्थित फिनटेक ऋणदाताओं को जल्द ही मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि विभिन्न राज्यों की पुलिस बल के आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके खिलाफ जाँच शुरू करने जा रहे हैं।

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह बताया गया कि जाँच एजेंसियों ने पहले ही रेजरपे और पेटीएम समेत कई पेमेंट गेटवे से कह दिया है कि वे लेन-देन और भुगतान को रोक दें।

एक अधिकारी ने द इकोनॉमिक टाइम्स से कहा, “ईडी और राज्यों की सीआईडी ​​ने चीन समर्थित फिनटेक संस्थाओं के खातों को रद्द करने के लिए कई पेमेंट गेटवे को नोटिस जारी किए गए हैं। इन कंपनियों से ऐसी संदिग्ध कंपनियों के खाते खोलने के कारणों के बारे में भी पूछताछ की जा रही है।”

उन्होंने कहा, “यहाँ एक बड़ी खामी है। पेमेंट गेटवे ने अधिक नकदी प्रवाह उत्पन्न करने की जल्दी में इन चीनी संस्थाओं के लिए खाते खोल दिए। इन्हीं लेने-देन वाले पैसों का पता लगाने के लिए केवाईसी का होना जरूरी है।”

पेडे की ऋण देने वाली कंपनियाँ जबदस्ती संग्रह, उच्च ब्याज दरों और धोखाधड़ी करने को लेकर सुर्खियों में रही हैं। पेडे ऋण एक अल्पकालिक असुरक्षित ऋण है, जिसमें अक्सर उच्च ब्याज दरें होती हैं। नकदी की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के लिए उधारकर्ता कम समय के लिए इससे छोटे ऋण लेते हैं।

वर्तमान में प्रचलित इन ऑनलाइन ऐप्स में से अधिकांश भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के साथ पंजीकृत नहीं हैं। इस वजह से जनता को उधार देने का अधिकार नहीं है। इनमें से अधिकांश ऐप को चीनी समर्थन है और एक पंजीकृत पता या वैध मोबाइल नंबर नहीं है।