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“न्यायालय की शादी करने वाली टिप्पणी को गलत ढंग से संदर्भित किया गया”- एसए बोबडे

देश के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने सोमवार (8 मार्च) को दुष्कर्म के एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई ‘शादी करने’ वाली टिप्पणी पर खड़े हुए विवाद को लेकर कहा, “एक संस्था के तौर पर हम महिलाओं का सम्मान करते हैं। मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता ने पूरे मामले को गलत संदर्भित किया है, जिस वजह से यह विवाद उत्पन्न हुआ है।”

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “सर्वोच्च न्यायाल ने हमेशा महिलाओं को सबसे अधिक सम्मान दिया है। हमने सुनवाई में शादी करने का कोई सुझाव नहीं दिया था कि पीड़िता से शादी कर लो। हमने सिर्फ पूछा था कि क्या तुम शादी करोगे। उस पूरे मामले की गलत तरह से रिपोर्टिंग की गई है।”

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिक प्रोडक्शन कंपनी (एमएसइपीसी) में बतौर टेक्नीशियन कार्यरत अभियुक्त मोहित सुभाष चव्हाण की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। अभियुक्त पर 14 वर्ष की स्कूली छात्रा ने बलात्कार का आरोप लगाया गया है। न्यायालय ने शादी के झूठे वादे पर किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तारी से चार हफ्ते की अंतरिम राहत दे दी है।

बता दें कि गत सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की पीठ ने दुष्कर्म के एक आरोपी से पूछा था कि अगर आप पीड़िता से शादी करना चाहते हैं, तो हम आपकी मदद कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो आपकी नौकरी चली जाएगी, आप जेल जाएँगे। आपने लड़की के साथ छेड़खानी की, उसके साथ दुष्कर्म किया है।