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केंद्र सरकार ने परिषद भंग कर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्थापना की, बेहतर होगी शिक्षा

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों को लागू करते हुए केंद्र सरकार ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को समाप्त करते हुए चार अन्य स्वायत्त बोर्डों के साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की स्थापना की है।

एनएमसी को दिन-प्रतिदिन के कामकाज में मदद करने के लिए पूर्वस्नातक व स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड और नैतिकता व चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड का गठन किया गया है। चार बोर्ड शुक्रवार से प्रभाव में आ गए। दशकों पुराना एमसीआई समाप्त हो गया है।

डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, एम्स के ईएनटी विभाग में प्रोफेसर डॉक्टर सुरेश चंद्र शर्मा को आयोग के पहले अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल के लिए होगा या जब तक वह 70 वर्ष के नहीं हो जाते हैं। एमसीआई के गवर्निंग बोर्ड के सचिव राकेश कुमार वत्स नवगठित निकाय में सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इससे पूर्व, 2018 में यह निर्णय लिया गया था कि एमसीआई को भंग कर दिया जाएगा और एक नया निकाय बनाया जाएगा। इसके बाद अगस्त 2019 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 पारित किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, नए आयोग में एक अध्यक्ष, 10 पदेन सदस्य और 22 अंशकालिक सदस्य होंगे। सुधारों का उद्देश्य देश की चिकित्सा शिक्षा को पारदर्शी, गुणात्मक और जवाबदेह प्रणाली की ओर बढ़ाना है। मूल परिवर्तन यह है कि निर्वाचित नियामक के विपरीत अब नियामक श्रेष्ठता के आधार पर चयनित करेगा।