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कृषि कानूनों को डेढ़ वर्ष निलंबित करने को केंद्र सरकार तैयार पर किसान राजी नहीं

नए कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की वार्ता हुई। बैठक के बाद बाहर निकले किसान नेता ने कहा, “सरकार डेढ़ वर्ष के लिए कानूनों को निलंबित करने को तैयार है लेकिन इसका कोई अर्थ नहीं है। हम कानूनों को निरस्त करना चाहते हैं।” अब किसानों और सरकार के बीच अगले दौर की बैठक 22 जनवरी को होगी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली वार्ताओं की तरह कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ किसान नेताओं की विज्ञान भवन में हुई यह भी वार्ता बेनतीजा रही। कानूनों पर अस्थायी रोक का सरकार ने जो प्रस्ताव दिया था, उससे किसान नेता सहमत नहीं हुए और सरकार की आंदोलन समाप्त करने की अपील ठुकरा दी।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, “केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक कानून बनाना होगा। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना होगा। हमारा विरोध सरकार और कॉरपोरेट व्यवस्था के खिलाफ है।”

सिंधु सीमा पर किसानों का विरोध प्रदर्शन 56वें दिन भी जारी है। बता दें कि 12 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी थी। न्यायालय द्वारा गठित समिति से दो महीने में अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।

अब समिति 21 जनवरी को किसानों के साथ अपनी पहली बैठक करेगी। समिति के सदस्य अनिल घणावत ने जानकारी दी थी कि हमारे सामने बड़ी चुनौती आंदोलनकारी किसानों को इस मामले पर चर्चा के लिए मनाने की है।