समाचार
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भ्रम के बीच रबी की दरों में वृद्धि से सरकार का विपक्ष को जवाब

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को मानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इससे किसानों को बहुत राहत मिलेगी।

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर चल रही सरकार ने कृषक उत्पादों की बिक्री के लिए राज्यों के कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) कानून के तहत संचालित मंडियों के अलावा एक वैकल्पिक चैनल मुहैया कराने के लिए नया कानून बनाया है।

नए कानून में गेहूँ, चावल या अन्य मोटा अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल, सब्जी, फल, मेवा, मसाले, गन्ना, कुक्कुट, सूअर, बकरी, मछली व डेरी उत्पादों सहित ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनका नैसर्गिक या प्रसंस्कृत रूप में मानव उपभोग करता है, उनको कृषक उत्पाद कहा गया है।

केंद्र कृष‍ि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश पर कुछ फसलों के बुवाई सत्र से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। इससे यह होता है कि बाजार में किसानों की फसल की कीमतें गिरने के बावजूद सरकार उन्हें तय मूल्य देगी। इससे नुकसान कम करने की कोश‍िश की जाती है।

हालाँकि, सभी सरकारें किसानों को इसका लाभ नहीं देती हैं। इस वक्त बिहार और मध्य प्रदेश में बुरा हाल है। वहाँ किसानों को एमएसपी नहीं मिल रहा है। शांता कुमार समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि सिर्फ 6 प्रतिशत किसानों को ही एमएसपी का लाभ मिलता है और 94 प्रतिशत बाज़ार पर निर्भर रहते हैं।