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केंद्र ने तीनों सेनाओं को 15 दिनों के युद्ध के लिए हथियारों का भंडारण करने को कहा

चीन की चालाकियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत तीनों सेनाओं को 15 दिनों के युद्ध के लिए हथियार और गोला-बारूद का भंडारण करने को कहा गया है। यही नहीं, विदेश से भी 50 हजार करोड़ रुपये के हथियार खरीदने की बड़ी योजना है।

एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के बीच हाल के तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह तैयारी करने को कहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार (14 दिसंबर) को ही संकेत दिए थे कि चीन के साथ विवाद कोई भी रुख ले सकता है। उन्होंने कहा था, “विवाद लंबा खिंच सकता है क्योंकि चीन पीछे हटने को तैयार नहीं है।”

चीनी सेना भी स्वयं को मजबूत करने में जुट गई है। शीर्ष अधिकारियों का कहना है, “एलएसी के गहराई वाले क्षेत्रों में 20 से ज्यादा सेना के कैंप बनाए गए हैं। यह कैंप भारत के साथ तनातनी के बाद बनाए गए, जिसमें सेना से संबंधित सभी आवश्यक वस्तुएँ रखी गई हैं।”

आशंका है कि पाकिस्तान भी चीन का युद्ध में साथ दे सकता है। लद्दाख विवाद जब शुरू हुआ था, तब खबर आई थी कि चीनी लड़ाकू विमान पाकिस्तानी वायुसेना के हवाई अड्डे का उपयोग अभ्यास के लिए कर रहे हैं।

देश के पास 40 दिनों के युद्ध के लिए गोला-बारूद रहता है। हालाँकि, भंडारण और युद्धों के स्वरूप में होने वाले बदलाव के चलते 1999 में इसे घटाकर 20 दिन किया गया था। एक और समीक्षा के बाद भंडारण 10 दिन तक सीमित कर दिया गया था।

तत्कालीन रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों के खरीद के अधिकार को 100 करोड़ से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया था। हथियारों की खरीद के लिए तीनों सेनाओं के आपातकालीन फंड को बढ़ाकर 300 करोड़ किया था।