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नहीं होगा निजता के अधिकार का उल्लंघन, केंद्र ने न्यायालय को सौंपा शपथपत्र

गृह मंत्रालय के द्वारा 20 दिसंबर 2018 को निजता के अधिकार पर अधिसूचना जारी की थी जिसके तहत, सरकार की 10 केंद्र संस्थाएँ ही सिर्फ नागरिकों के कम्प्यूटरों से डाटा लेकर उनकी जाँच कर सकती हैं। और इस अधिसूचना में केंद्र ने उच्चत्तम न्यायालय को आश्वासन दिलाया है कि कानून की पालना करने वाले किसी भी नागरिक का यह निजता के अधिकार का दुरुपयोग उन संस्थाओं द्वारा नहीं किया जाएगा, लाइव लॉ  ने रिपोर्ट किया।

केंद्र ने इस अधिसूचना में बताया कि कम्प्यूटरों से डाटा की जानकारी सिर्फ कुछ नामांकित संस्थाएँ ही ले सकती हैं और उसकी जाँच कर सकती है। डाटा की यह जाँच देश के लिए वैध हितों में ही की जाएगी और इस जाँच के आदेश भी सिर्फ केंद्रीय गृह सचिव ही दे सकते हैं।

अधिसूचना में जिन केंद्रीय 10 संस्थाओं को जानकारी लेने के अधिकार देने की बात की गई हैं वह हैं- ख़ुफ़िया विभाग, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व आसूचना निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण, मंत्रिमंडल सचिवालय, जम्मू-कश्मीर, उत्तर पूर्वीय भारत और असम इलाके में सिग्नल आसूचना निदेशालय और दिल्ली पुलिस के साधिकार प्रतिनिधि ही जाँच कर सकते हैं।

इस अधिसूचना को जारी करने के कारण केंद्र से साफ़ बताएँ हैं कि नागरिकों कम्प्यूटरों से डाटा की जानकारी क़ानून की देख-रेख में की जाएगी। और केंद्र मंत्रालय इस बात का ध्यान रखेगा कि क़ानून की पालना करने वाले किसी भी नागरिक के निजता के अधिकार का उल्लंघन यह संस्थाएँ न करें।

देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के कारणों पर ही ये संस्थानें डाटा की जाँच करेंगी।