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मध्य प्रदेश में मधुपाश के तार नेताओं से जुड़ने के बाद सीबीआई जाँच की उठ रही मांग

मध्य प्रदेश के चर्चित मधुपाश मामले में नया खुलासा हुआ है। आतंक निरोधी दस्ता (एटीएस) और मध्य प्रदेश पुलिस के संयुक्त दल द्वारा पूछताछ के बाद कुछ नए नाम सामने आए हैं।

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, मधुपाश में फँसाने वाली महिलाओं के कॉल विवरण की जाँच के बीच एक केंद्रीय मंत्री का नाम सामने आया है, जिसके बाद सरकार ने इसपर एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) बनाने पर विचार कर रही है।

सरकार का मानना है कि एसटीएफ की जाँच में सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। चूँकि मामला हाई प्रोफाइल होता जा रहा है, इसलिए सरकार इसे एटीएस के हाथों से लेना चाहती है।

वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सीबीआई जाँच करवाने को लेकर सोमवार (23 सितंबर) को उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में दो याचिकाएँ दायर की गईं। यह यैचिका दिग्विजय भंडारी ने वकील मनोहर दलाल के माध्यम से दायर की।

याचिका में मांग की गई है कि मामले से जुड़े सभी वीडियो, सीडी, मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप और सीसीटीवी फुटेज को तत्काल कोर्ट की देखरेख में ले लिया जाए। याचिका में कहा गया है कि मामला हाई प्रोफाइल है, अत: सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है अथवा इन्हें नष्ट किया जा सकता है।

इसी प्रकार की एक अन्य याचिका विपिन शर्मा ने वकील नरेंद्र कुमार जैन के माध्यम से दायर की। इस याचिका में इंदौर नगर निगम के अभियंता हरभजन सिंह को आरोपी बनाने की मांग की गई है। दोनों याचिकाओं में मामले की जाँच सीबीआई से कराने की मांग भी की गई है।