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सर्वोच्च न्यायालय ने आप सरकार से पूछा, “मुफ्त मेट्रो सुविधा तो लागत की मांग क्यों”

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता की पीठ ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर तंज कसते हुए पूछा, “जब आप बड़े पैमाने पर मुफ्त की यात्रा की पेशकश कर रहे हैं तो दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के लिए भूमि की लागत का 50 प्रतिशत केंद्र सरकार से वहन करने को क्यों कह रहे हैं।”

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने अपनी याचिका में केंद्र से ज़मीन की लागत का आधा भुगतान करने के लिए नहीं कहा। हालाँकि, मेट्रो के विस्तार में लगने वाले भुगतान के करों में हिस्सेदारी और डीएमआरसी के जापान सरकार से लिए गए लोन को चुकाने में अक्षम साबित होने पर केंद्र सरकार द्वारा इसकी भरपाई करने को कहा है।

अदालत ने कहा, “एक तरफ दिल्ली सरकार मेट्रो का विस्तार कर रही है लेकिन अदालत से चाहती है कि वह केंद्र को अगर भविष्य में कभी नुकसान हो तो उसका 50 प्रतिशत भार वहन करने का निर्देश दे। अगर दिल्ली सरकार लोगों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देगी तो ऐसी समस्या जरूर उत्पन्न होगी।”

अदालत ने कहा, “वह यह निर्देश नहीं दे सकता है कि आप जनता के धन का दुरुपयोग करें। यह जानते हुए कि कोई खुद को दीवालिया करना चाहता है तो इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती है।”

अदालत की ये सारी टिप्पणियाँ आप सरकार की दिल्ली मेट्रो और डीटीसी व क्लस्टर बसों में महिलाओं को पूरी तरह मुफ्त यात्रा देने की योजना के संदर्भ में थीं। कई राजनीतिक दलों ने 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले इस कदम को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए केजरीवाल की आलोचना की थी।