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‘ट्वीट के लिए जेल नहीं’, कनोजिया रिहा लेकिन ऐसे अपराध पर उड़ाई थी दूसरे की खिल्ली

मंगलवार (11 जून) को सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और धार्मिक मान्यताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्रकार को जमानत दे दी है। हालाँकि आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को अनुमति दी है।

लाइव लॉ  के अनुसार प्रशांत कनोजिया की पत्नी की याचिका पर न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और अजय रस्तोगी ने यह आदेश जारी किया। उप्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त प्रधान पब्लिक प्रॉसिक्युटर विक्रमजीत बनर्जी का कहना था कि कनोजिया की गिरफ्तारी आवश्यक थी।

उन्होंने बताया कि कनोजिया की गिरफ्तारी मात्र मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए ही नहीं थी। वह दिसंबर 2017 से ईश्वर, धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक व्यवहारों का अपमान करते हुए ट्वीट कर रहा था। लेकिन इसकि प्रतिक्रिया में न्यायाधीश बनर्जी बोलीं, “हम उसके ट्वीट की प्रशंसा नहीं करते हैं लेकिन क्या इसके लिए उसे जेल में डाल दिया जाए?”

न्यायालय ने माना कि यह गिरफ्तारी अवैध थी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन करती है, इस प्रकार कनोजिया को जमानत दे दी गई। हालाँकि स्पष्ट रूप से यह भी कहा गया कि राज्य उसपर कानून सम्मत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

संयोगवश कुछ माह पहले ही सर्वोच्च न्यायालय ने रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा का उपहास किया था जब उसने एक व्यंगात्मक वीडिो पर ओडिशा सरकार द्वारा गिरफ्तारी से बचाव की मांग की थी। उस समय मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, “यदि आपका जीवन खतरे में है तो जेल से बेहतर स्थान क्या होगा? (जेल में) आपका जीवन सुरक्षित रहेगा।”

इसके फलस्वरूप नवीन पटनायक के नेृत्व वाली एडिशा सरकार ने मित्रा को लगभग 45 दिनों के लिए जेल में रखा था, जब तक कि सरकार ने उसपर लगे आरोपों को वापस न ले लिया।