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एनपीआर अद्यतन जनगणना 2021 से पहले, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 8,500 करोड़ आवंटित

मंगलवार (24 दिसंबर) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8,500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को आवंटित करने के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के अद्यतन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

पीटीआई के सूत्रों के अनुसार देश के “सामान्य निवासियों” की एक सूची यानी एनपीआर की प्रक्रिया असम को छोड़कर, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल और सितंबर, 2020 के बीच होगी। इसको 2021 की जनगणना के घरों के सूचीकरण चरण के साथ ही आयोजित किया जाएगा।

वर्ष 2015 में घर-घर सर्वेक्षण आयोजित कर आखिरी बार इन आँकड़ों का अद्यतन किया गया था जिसे अब डिजिटल कर दिया गया है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार इस बार एनपीआर का जनसांख्यिकीय के साथ-साथ निवासियों के बायोमेट्रिक विवरण के साथ अद्यतन किया जाएगा। एनपीआर के तहत एक “सामान्य निवासी” वह व्यक्ति है जो कम से कम छह महीने से एक क्षेत्र में रह रहा हो, या कोई व्यक्ति जो अगले छह महीने या उससे अधिक समय के लिए एक क्षेत्र में रहने की योजना बना रहा हो। इस तरह के निवासी का खुद को एनपीआर में पंजीकृत करना अनिवार्य होगा।

जनगणना आयोग के अनुसार, एनपीआर का उद्देश्य देश में सभी “सामान्य निवासियों” का एक व्यापक पहचान डाटाबेस तैयार करना है।

जनगणना से जुड़े इस अभ्यास को नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन की दिशा में प्रारंभिक कदम माना जा सकता है। हालाँकि, इस अभ्यास को आयोजित करने का मतलब यह नहीं है कि निश्चित रूप से एनआरसी का अभ्यास होगा, लेकिन एनडीटीवी  की रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, यह एनआरसी अभ्यास के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

एनपीआर के आँकड़ों को पहली बार 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) शासन के दूसरे कार्यकाल के दौरान 2011 की जनगणना के घरों के सूचीकरण चरण के साथ एकत्र किया गया था।