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“राज्य सरकारें बनाएँ इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विवादों के लिए विशेष न्यायालय”- केंद्र

इंफास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र ने कहा कि राज्य सरकारें इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना अनुबंधों से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए विशेष समर्पित न्यायालय स्थापित करें। यह ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने इलाहाबाद, कर्नाटक और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के उदाहरण पेश किए। दरअसल, वे विशेष अदालतों के रूप में काम करके इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की मुकदमेबाजी से निपटने के लिए एक विशेष दिन आवंटित करती हैं और समर्पित विशेष न्यायालयों का काम करती हैं।

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने सुझाव दिया कि अन्य उच्च न्यायालय भी विशिष्ट राहत (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत इस मार्ग का पता लगा सकते हैं, जब तक कि इसके लिए समर्पित न्यायालय स्थापित नहीं किए जाते हैं। मंत्रालय का मानना है कि यह समय और लागत दोनों के दृष्टिकोण से अनुबंधों की प्रवर्तनीयता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

केंद्र सरकार का मानना है कि इस कदम से निवेशकों के विश्वास में वृद्धि होगी और यह एक अनुकूल व्यावसायिक माहौल भी बनाएगा।

यह गौर किया जाना चाहिए कि केंद्र सरकार द्वारा इस शासनिक बयान से पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी अक्टूबर में सभी मुख्यमंत्रियों को उपरोक्त अधिनियम के तहत विशेष न्यायालयों को स्थापित करने के लिए पत्र लिखा था।