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गुलशन कुमार की हत्या के आरोपी अब्दुल की दोषसिद्धि को उच्च न्यायालय ने रखा यथावत

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गुरुवार (1 जुलाई) को संगीत की दुनिया के बड़े उद्योगपति रहे गुलशन कुमार की हत्या के मामले में दोषी सिद्ध हुए शार्पशूटर अब्दुल रऊफ दाऊद मर्चेंट पर अपने विचार यथावत रखा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के गुर्गे अब्दुल रऊफ की ओर से अपनी दोषसिद्धि और उक्त मामले में उसे दिया गया आजीवन कारावास के दंड को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया।

न्यायाधीश एसएस जाधव और जस्टिस न्यायाधीश बोरकर की पीठ ने मर्चेंट की आजीवन कारावास के दंड को यथावत रखा और निर्देश दिया कि दो बार भागने के पिछले आचरण को देखते हुए उसे कोई छूट नहीं दी जाएगी।

उच्च न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्णय सुनाते हुए कहा, “अब्दुल मर्चेंट को सेशन कोर्ट के सामने या डीएन नगर पुलिस स्टेशन के सामने आत्मसमर्पण करना होगा। फिर वह अपना पासपोर्ट पुलिस को सौंप देगा। यदि वह आत्मसमर्पण नहीं करता है तो सत्र न्यायालय गैर-जमानती वॉरंट पर अमल करेगा और उसे हिरासत में ले लेगा।”

बता दें कि टी-सीरीज़ के संस्थापक और हिंदी फिल्म निर्माता गुलशन कुमार की 19 अगस्त 1997 को जुहू में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने घटना को कारोबारी शत्रुता का मामला बताया था।

टिप्स के मालिक रमेश तौरानी सहित हत्या के मामले में कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पाँच वर्ष बाद एक निचली अदालत ने केवल अब्दुल को दोषी ठहराने के लिए सबूत पाया। बाकी अन्य 18 आरोपियों को मुक्त कर दिया गया था।