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बिहार विधानसभा- विपक्ष के महागठबंधन में नेतृत्व और सीटों को लेकर पड़ रही फूट
  • विधानसभा चुनाव के करीब आने के साथ बिहार में विपक्ष के महागठबंधन की सीटों के बंटवारे और नेतृत्व को लेकर अंतर्कलह नज़र आने लगी है। कांग्रेस ने अधिक सीटों के साथ नेतृत्व का दावा किया तो हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के मुखिया जीतनराम मांझी, राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और कासशील इंन्‍सान पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी की तिकड़ी ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर दबाव बढ़ा दिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस तिकड़ी को कांग्रेस का समर्थन है पर आरजेडी भी पीछे हटने के इरादे में नहीं है। तीनों दलों के मुखिया ने चुनाव में सीटों व नेतृत्व के मुद्दे को लेकर एक गुप्त बैठक की, जिसके बाद कई नए राजनीतिक अर्थ निकाले जाने शुरू हो गए। यह गुप्त बैठक कांग्रेस के आरजेडी विरोधी बयान के बाद हुई।

जीतनराम मांझी पूर्व से ही महागठबंधन में समन्‍वय समिति की मांग उठाते रहे हैं। वे कहते रहे कि सभी बडे़ फैसले समिति करे। शुक्रवार (5 जून) को कांग्रेस के पूर्व नेता निखिल कुमार के घर पर बैठक हुई थी, जिनमें इन्हीं मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें भी सीट बंटवारे और नेतृत्व के मुद्दों को लेकर आरजेडी पर दबाव बनाया गया था।

इसके बाद कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंह ने बिहार चुनाव में सीट बंटवारे पर अपना नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि गत विधानसभा चुनाव में गठबंधन में साथ रहे जदयू की 102 सीटों का महागठबंधन के घटक दलों के बीच बंटवारा हो और सबसे अधिक हिस्सा कांग्रेस को मिले। इसका कांग्रेस नेता अखिलेश शर्मा और सदानंद सिंह ने समर्थन किया।

इस तरह की रणनीतियाँ और बयानबाजियाँ साफ दर्शा रही कि इनमें जल्द फूट पड़ने की आशंका है। आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि केवल सीट ले लेने से कोई चुनाव नहीं जीत जाता है। कांग्रेस को अपने हकीकत पर पर्दा नहीं डालना चाहिए।