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प्रधानमंत्री मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागरिकता संशोधन विधेयक को मंज़ूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को अपनी मंज़ूरी दे दी। इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर-मुस्लिमों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व इसाई) को भारतीय नागरिकता देने में आसानी होगी।

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, यह विधेयक नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करता है, जिससे चयनित श्रेणियों के लोग भारतीय नागरिकता के लिए पात्र बन सकेंगे। विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, तृणमूल, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राजद और वामदलों ने इसका पुरजोर विरोध किया। यहाँ तक कि क्षेत्रीय दलों जैसे बीजद ने आरक्षण की बात कही।

रिपोर्टों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस विधेयक को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक माना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हवाले से कहा गया, “पड़ोसी लोकतांत्रिक देशों में अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। नागरिकता का यह विस्तार सर्व धर्म समभाव की भावना की पुष्टि करेगा।”

सरकार शीतकालीन सत्र में ही विधेयक को संसद में प्रस्तुत कर सकती है। मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल (जनवरी) में इसे लोकसभा में पारित करा लिया था लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण राज्यसभा में यह अटक गया था।