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ईसाई न होने के बावजूद महिला कैदियों के बच्चों को बाइबल पढ़ाई जा रही- बाल आयोग

महिला कैदियों के बच्चों की शैक्षिक स्थिति पर किए गए एक अध्ययन में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को पता चला है कि बच्चों को बाइबल के उदाहरण के साथ पढ़ाया जा रहा है। फिर चाहे भले ही वे ईसाई न हों।

यह रिपोर्ट महिला कैदियों, उनके बच्चों, बाल गृहों और छात्रावास के मुखिया, स्कूलों के मुखिया और जेल अधिकारियों से प्राप्त 144 प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में महिला कैदियों की 8 जेलों को रिपोर्ट में सम्मिलित किया गया है।

अनुच्छेद के तहत, “जेलों के दौरों और वहाँ होने वाली समस्याओं को देखने के बाद उनको चिह्नित किया गया।” रिपोर्ट में लखनऊ की महिला कैदियों से भरी एक जेल का उदाहरण देते हुए उसे इंगिता किया, जिसने वहाँ रहने वाले बच्चों को बाइबल सिखाने की अनुमति दी है।

रिपोर्ट में गाजियाबाद के एक बाल गृह में हुए औचक दौरे का भी उल्लेख किया गया है, जहाँ महिला कैदियों के बच्चे रहते हैं। इसमें कहा गया कि आयोग ने औचक निरीक्षण के रूप में दौरा किया और गैर ईसाई बच्चों के लॉकर और कमरों से करीब 26 बाइबल हासिल कीं।