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आशा कार्यकर्ता पर कोविड-19 सेवा के दौरान भीड़ का हमला, “मस्जिद से हुई थी घोषणा”

अक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट (आशा) कार्यकर्ता पर बेंगलुरु के सादिक नगर में बुधवार (1 अप्रैल) रात को 50लोगों की भीड़ ने हमला किया, डेक्कन हेराल्ड  ने रिपोर्ट किया।

अन्य अधिकारियों के साथ आशा कार्यकर्ता निवासियों में कोविड-19 के लक्षण देखने के लिए गई थीं। ऐसा इसलिए क्योंकि क्षेत्र में घरों में काम करने वाली एक महिला में सकारात्मक कोविड-19 पाया गया। समूह यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहा था कि निवासियों में से किसी ने निज़ामुद्दीन के तबलीगी जमात कार्यक्रम में प्रतिभाग किया था क्या।


इस दौरान आशा कार्यकर्ता का कहना है कि ‘अल्पसंख्यक समुदाय’ के 40-50 लोगों ने उसे घेरकर हाथापाई की और कोविड-19 के विषय में न पूछने की धमकी दी। उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं चाहते कोई उनके क्षेत्र में आए।

“समस्या तब शुरू हुई जब मस्जिद से हमारे विरुद्ध घोषणा की गई थी।”, आशा कार्यकर्ता ने एएनआई  को बताया। कार्यकर्ता का यह भी आरोप है कि भीड़ ने उनसे कोविड-19 से जुड़े दस्तावेज और मोबाइल फोन छीने।