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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल धनखड़ विधानसभा के सामने धरने पर, सदन स्थगन पर मतभेद

पश्चिम बंगाल राजनीति में नया नाटक देखने को मिला है जिससे साफ है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। गुरुवार (5 दिसंबर) को राज्यपाल धनखड़ विधानसभाा पहुँचे तो उन्हें विधानसभा का द्वार बंद मिला।

दरअसल गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल धनखड़ को खाने पर बुलाया था लेकिन अंतिम समय पर कार्यक्रम रद्द कर दिया गया और साथ ही दो दिन के लिए विधानसभा को बंद कर दिया गया।

इसके बाद राज्यपाल धनखड़ को फाटक बंद होने की वजह से फाटक नंबर-2 पर कुछ देर तक प्रतीक्षा भी करनी पड़ी। धनखड़ विधानसभा पहुँचे तो फाटक बंद होने के कारण उन्होंने फाटक नंबर-2 से सदन में प्रवेश किया और उसी द्वार पर धरने पर बैठ गए।

इस दौरान मीडिया से राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ऐसे गणतंत्र नहीं चलेगा। यह उनका अपमान है। राज्य में कई मौकों पर उनका अपमान किया गया है और यह एक साजिश है।

राज्यपाल ने कहा, “मेरा मकसद इस ऐतिहासिक इमारत को देखने का था, लाइब्रेरी का दौरा करने का था। विधानसभा स्थगित है, इसका यह मतलब नहीं है कि सदन को भी बंद रखना है। पूरा सचिवालय खुला होना चाहिए।”

राज्यपाल ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी को पत्र लिखकर कहा कि वे विधानसभा की सुविधाओं का जायजा लेने के उद्देश्य से विधानसभा और पुस्तकालय का दौरा करेंगे।

विधानसबा में प्रस्तुत होने वाले विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति न मिलने के कारण सदन स्थगन पर उन्होंने कहा, “मैं संविधान के आलोक में विधेयकों की जाँच करने और बिना विलंब के काम करने के लिए बाध्य हूँ। इस मामले में सरकार की तरफ से विलंब हुआ है।”