समाचार
कोविड-19- आयुष मंत्रालय ने दी वासा व गुडूची घाना के प्रभाव के अध्ययन की स्वीकृति

कोविड-19 के संक्रमित मरीज़ों में लक्षणों के चिकित्सीय प्रबंधन में आयुष मंत्रालय ने वासा घाना, गुडूची घाना और वासा-गुडूची घाना की भूमिका का आंकलन करने के लिए एक नैदानिक ​​अध्ययन करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।

मंत्रालय ने शुक्रवार (25 सितंबर) को कहा, “यह एक रैंडमाइज़्ड ओपन लेबल थ्री आर्म्ड स्टडी होगी। इसे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की आईजीआईबी इकाई के सहयोग से नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में किया जाएगा।”

कोविड-19 के त्वरित समाधान की आवश्यकता को देखते हुए आयुष मंत्रालय ने कई चैनलों के माध्यम से विभिन्न संभावित समाधानों पर व्यवस्थित अध्ययन किया है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “इस प्रयास के तहत कोविड-19 से संक्रमित मरीज़ों को बीमारी के लक्षणों में राहत देने में वासा घाना, गुडूची घाना और वासा-गुडूची घाना की भूमिका का क्लीनिकल अध्ययन किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।”

परिणाम के उपायों, नैदानिक व प्रयोगशाला मापदंडों सहित कार्यप्रणाली के साथ विस्तृत प्रस्ताव, अनुसंधान का संचालन तैयार हो चुका है। अध्ययन एक यूनीक केस रिपोर्ट फोरम (सीआरएफ) का उपयोग करेगा, जो आयुष मोड अनुसंधान के लिए उपयुक्त है।

सीआरएफ व अध्ययन प्रोटोकॉल की भी आधुनिक चिकित्सा सहित विभिन्न डोमेन के विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की गई है और उनके सुझावों को शामिल किया गया है। अध्ययन संस्थागत आचार समिति (आईईसी) की तरह आवश्यक सिफारिश के अधीन किया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा, “इसमें यह भी देखा जाएगा कि क्या उक्त मोनो-हर्बल और पॉलीहर्बल फॉर्मूलेशन कोविड-19 से जुड़े प्रमुख जैव मार्करों की अभिव्यक्ति की रूपरेखाओं को बदल सकते हैं।”

मंत्रालय ने कहा, “वासा और गुडूची भारतीय स्वास्थ्य परंपराओं में समय-समय पर परीक्षण की जाने वाली जड़ी-बूटियाँ हैं, जिनका उपयोग विभिन्न रोग की स्थितियों में किया जाता है। इस अध्ययन के परिणाम पूरे आयुष क्षेत्र के लिए काफी रुचिकर होंगे।”