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अयोध्या विवादित भूमि- शिया वक्फ बोर्ड अपना एक तिहाई हिस्सा हिंदुओं को देना चाहता

सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या मसले पर शिया वक्फ बोर्ड ने कहा, “वे विवादित जमीन का तिहाई हिस्सा मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को देने को तैयार है।” 2.77 एकड़ की एक तिहाई ज़मीन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में मुस्लिम संगठनों को आवंटित की थी।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने हिंदू पक्ष की दलीलों पर सुनवाई पूरी की। शिया वक्फ बोर्ड ने अदालत से कहा, “विवादित ज़मीन के मामले में मैं हिंदू पक्ष का समर्थन कर रहा हूँ।”

शिया वक्फ बोर्ड के वकील ने कहा, “उच्च न्यायालय ने विवादित भूमि को 3 बराबर हिस्सों में बाँटकर एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को दिया था। ना कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को। इसलिए वह अपना हिस्सा हिंदुओं को देना चाहता है, जिसका एक आधार यह भी है कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ की संपत्ति है।”

उन्होंने आगे कहा, “1936 तक इस पर शियाओं का कब्जा था और इसके पहले व अंतिम मुतवल्ली (देखभाल करने वाला) शिया थे। कभी किसी सुन्नी को मुतवल्ली नियुक्त नहीं किया गया। बाबर का कमांडर मीर बकी शिया मुस्लिम था और बाबरी मस्जिद का पहला मुतवल्ली था।”

इससे पूर्व, अखिल भारतीय श्रीराम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने विवादित स्थल के ज़मीन रिकॉर्ड में हस्तक्षेप किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जमीन पर दावे को लेकर मुसलमानों का कोई ठोस पक्ष नहीं है। वाकिफ (वक्फ करने वाला) को जमीन का मालिक होना चाहिए। बाबर जमीन का मालिक नहीं था।”