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ऑटो उद्योग में 12 महीने की समस्या के बाद मांग स्थिरता के संकेत, बीएस-6 चुनौती शेष
आईएएनएस - 26th December 2019

12 महीने के कठिन दौर के बाद, ऑटो उद्योग के विभिन्न अनुभागों में मांग स्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं लेकिन ऑटो उद्योग को भारत चरण 6 (बीएस-6) में परिवर्तन की अंतिम चुनौती का सामना करना अभी भी बाकी है।

मोतीलाल ओसवाल इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की बुधवार (25 दिसंबर) को जारी रिपोर्ट के अनुसार उच्च छूट, वित्त की बेहतर उपलब्धता और ग्रामीण भावना में सुधार के कारण स्थिरता आंशिक रूप से दिखाई दी है।

रिपोर्ट में कहा गया, “हालाँकि बुरा खत्म होता हुआ दिख रहा है पर बीएस-6 में परिवर्तन के रूप में अंतिम बाधा पर विचार करते हुए हम 100 प्रतिशत सुधार की उम्मीद नहीं करते हैं।”

कहा गया कि मांग परिवेश में दिख रही स्थिरता और माल सूची में नियंत्रण से “बीएस-6 में परिवर्तन, बीएस-4 की तुलना में कम परेशानी भरा होगा।”

रिपोर्ट में कहा गया, “लागत मुद्रास्फीति की मात्रा, प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में बदलाव की संभावना और मूल्य परवर्तन को देखते हुए बीएस-6 में परिवर्तन निजी एवं व्यापारिक वाहनोंं के बजाए दो-पहिया वाहनों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगा।”

भारतीय वाहन निर्माता अप्रैल, 2020 से बीएस-6 में परिवर्तन के लिए तैयार हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दोपहिया वाहनों और डीज़ल से चलने वाले निजी वहनों के लिए कुछ पूर्व-खरीद की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन यह वाणिज्यिक वाहनों के मामले में सीमित हो सकती है, क्योंकि चालकों के पास 30-40 प्रतिशत अतिरिक्त क्षमता है।

“सरकार द्वारा कर कटौती की घोषणा ऑटो सेक्टर के दीर्घकालिक आकर्षण को बढ़ाती है क्योंकि मांग में चक्रीय पुनरुद्धार के साथ कम कर विनिमय की दर में अनुपातहीन सुधार करेंगे।”, रिपोर्ट में कहा।

“हालाँकि, आयशर मोटर्स, अशोक लीलैंड, एस्कॉर्ट्स, हीरो मोटो, बॉश, अमारा राजा, एक्साइड और सीईएटी को कर की दर में कटौती से सबसे अधिक लाभ हो सकता है जबकि मारुति और टाटा मोटर्स इससे कम लाभान्वित होंगे।” रिपोर्ट में कहा।