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‘मुस्लिम पक्ष एएसआई की रिपोर्ट को सिर्फ राय नहीं कह सकते हैं’- सर्वोच्च न्यायालय
आईएएनएस - 28th September 2019

सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान कहा, “2003 की खुदाई में एएसआई की रिपोर्ट बहुत ही संस्कारित ज्ञान के साथ अध्ययन करके विकसित की गई है। मुस्लिम पक्ष इसे सिर्फ राय नहीं कह सकते हैं।”

अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा, “पुरातत्वविद खुदाई के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर काम कर रहे थे।”

मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद एएसआई की रिपोर्ट को लेकर उठाए जा रहे लगातार सवालों पर अदालत ने कुछ तल्ख टिप्पणियाँ भी कीं। न्यायाधीश एसए नजेर ने मुस्लिम पक्ष की अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा से कहा, “आप आयुक्त की रिपोर्ट (एएसआई) की किसी अन्य सामान्य राय से बराबरी नहीं कर सकती हैं।”

इस पर न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “एएसआई की रिपोर्ट में अनुमान का अध्ययन बहुत ही संस्कारित ज्ञान के साथ है।” न्यायमूर्ति एसए बोबड़े ने कहा, “हमें यह देखना होगा कि क्या आपके निष्कर्ष वैध हैं। हम निष्कर्ष की वैधता का परीक्षण करेंगे।”

मीनाक्षी अरोड़ा ने अपने तर्क के दौरान कहा, “एएसआई की रिपोर्ट काल्पनिक है। उनकी रिपोर्ट यह भी कहती है कि राम का चबूतरा एक पानी की टंकी थी।”

इस पर न्यायाधीश नाजेर ने कहा, “आप साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 कैसे लागू कर रही हैं। आपकी बात से लगता है कि पुरातत्व विज्ञान नहीं है।” इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा, “क्या आपके पास कोई ऐसा पुरातत्व वैज्ञानिक है, जो एएसआई की रिपोर्ट को नकार दे।”

अरोड़ा ने कहा, “एएसआई की रिपोर्ट एक राय है और अदालत को अन्य सबूतों को भी देखना चाहिए। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, “दोनों पक्षों के पास कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं। सभी पक्ष का मामला पुरातत्व रिपोर्ट के नजरिये पर टिका है।”