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संसद में संस्कृति मंत्री ने बताया, “एएसआई ने रामसेतु के अध्ययन की स्वीकृति दी”

केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने मंगलवार (3 फरवरी) को संसद को बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पौराणिक रामसेतु के अस्तित्व के एक वैज्ञानिक अध्ययन के लिए अपनी अनुमति दे दी है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, संसद में कई सवालों के जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि एएसआई ने खुदाई और देखरेख करने के लिए अगस्त 2020 में छह नए सर्कल स्थापित किए हैं।

अपने तीसरे उत्तर में प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा “एएसआई ने पौराणिक रामसेतु के अस्तित्व के एक वैज्ञानिक अध्ययन के लिए अपना संकेत दिया है, जो भारत को श्रीलंका से जोड़े है। यह जाँच अक्टूबर 2020 से सितंबर 2021 तक के लिए की जा रही है।”

उन्होंने कहा, “फील्ड सीज़न 2020-21 के लिए केंद्रीय सलाहकार बोर्ड ऑफ़ आर्कियोलॉजी (एसीए ऑफ काबा) की स्थायी समिति ने रामेश्वरम के जिला रमानाथपुरम (तमिलनाडु) के धनुषकोटि से सीएसआईआर- राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआईओ) गोवा के लिए अध्ययन के प्रस्ताव की सिफारिश की है।

इससे पूर्व, दिसंबर 2020 में एएसआई के तहत एक निकाय ने राम सेतु की आयु निर्धारित करने के लिए पानी के नीचे की खोज परियोजना के प्रस्ताव को अनुमति दी थी।

इस अध्ययन को एएसआई के केंद्रीय सलाहकार बोर्ड सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑसनोग्राफी (एनआईओ), गोवा द्वारा किया जाएगा। वह पता लगाएगी कि इसका निर्माण किस कालखंड में और कैसे हुआ था।