समाचार
“35-ए है ऐतिहासिक गलती, जम्मू-कश्मीर को आर्थिक रूप से बनाया पिछड़ा”- जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अनुच्छेद 35-ए को संवैधानिक रूप से दोषपूर्ण बताया है। उनका कहना है, “यह वहाँ के आर्थिक विकास की राह में रोड़ा बनकर खड़ा हुआ है। इसकी वजह से वहाँ की जनता को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस धारा की वजह से जम्मू कश्मीर में निवेश थम गया है और रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं। ”

ट्विटर के ज़रिए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ज्यादातर भारतीय मानते हैं कि 35-ए के आने के पीछे नेहरू का दृष्टिकोण जिम्मेदार है। 1954 में अनुच्छेद ए संविधान में चुपके से जोड़ा गया था। यह न तो संविधान सभा द्वारा तैयार किए गए मूल संविधान का हिस्सा था और न ही यह संविधान के 368 के तहत एक संवैधानिक संशोधन के रूप में आया था। इसके लिए संसद के दोनों सदनों के दो-तिहाई बहुमत से सिफारिश की जरूरत होती है।”

जेटली ने आगे कहा, “अनुच्छेद 35-ए ने राज्य में रहने वाले दो नागरिकों के बीच भेदभाव  करने का अधिकार दिया है, जबकि कुछ को स्थायी निवासियों के रूप में घोषित किया है। जम्मू-कश्मीर के लाखों नागरिक लोकसभा चुनाव में वोट देते हैं लेकिन विधानसभा, नगरपालिका या पंचायत चुनावों में वोट नहीं देते हैं। उनके बच्चों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती है।”

अरुण जेटली ने कहा, “राज्य के अंदर आर्थिक संसाधन बहुत कम हैं। कोई भी निवेशक राज्य में इंडस्ट्री, होटल, शिक्षण संस्थान या प्राइवेट अस्पताल नहीं बनवा सकता है। इसकी वजह है कि यहां कोई बाहरी जमीन नहीं खरीद सकता है। अनुच्छेद के प्रावधानों के मुताबिक, सिर्फ वहां के स्थायी निवासी ही राज्य में भूमि खरीद सकते हैं। इसने कई दशक से राज्य की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।”