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तय समय सीमा के बाद पटाखे फोड़ने के लिए दिल्ली न्यायालय ने दोषी करार किया

एक दिल्ली निवासी जिसे राष्ट्रीय राजधानी में 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने के लिए गिरफ्तार किया गया था, उसे अब स्थानीय दिल्ली न्यायालय ने इस ‘अपराध’ के लिए दोषी पाया है। 7 नवंबर 2018 को हुई घटना के लिए आरोपी मयंक सिंह को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जितेंद्र सिंह ने दोषी करार दिया।

पहाड़गंज में मयंक पटाखे फोड़ रहा था जिसपर पुलिस पैट्रोल ने उसे मना कर चेतावनी दी। किसी आपातकाल बुलावे पर पुलिस वहाँ से चली गई और जब वापस लौटी तो पाया कि वह तब भी पटाखे फोड़ रहा था। इसके चलते पुलिस ने अवमानना के आरोप में उसपर आपराधिक धारा 188 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।

अपने बचाव में मयंक ने कहा कि उसे नहीं पता था कि सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखे फोड़ने के समय को सीमित किया है। फैसला सुनाते समय मजिस्ट्रेट ने पाया कि जाँच के समय आरोपी के पक्ष में कुछ नहीं पाया गया और यह सिद्ध होता है कि उसने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अवमानना की।

दोषी पाए जाने के बाद न्यायाधीश ने देखा कि मयंक का रिकॉर्ड साफ रहा है जिस कारण से उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। साथ ही कार्यवाही पर व्यय सरकारी रुपये के लिए उससे 500 रुपये लिए गए, लाइव लॉ  ने रिपोर्ट किया।