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लेह की जनता के लिए भारतीय सेना ने सिंधु नदी पर बनाया मैत्री पुल, हुआ उद्घाटन

लेह के चोगलमसर गाँव की सिंधु नदी पर 260 फुट के सबसे लंबे सस्पेंशन पुल को बना कर तैयार कर दिया है और इस पुल को सोमवार (1 अप्रैल) से आम जनता के इस्तेमाल के लिए भी शुरू कर दिया गया है।

लेह-लद्दाख में आम जनता और सेना के बीच अच्छे संबंध को दर्शाने के लिए इस पुल का नाम ‘मैत्री पुल’ रखा गया है। केबल सस्पेंशन पुल को इंजीनियरिंग की आधुनिक तकनीकियों से बनाया गया है। पुल को  थल सेना की अग्नि और रोष वाहिनी के जांबाज़ इंजीनियरों ने मात्र 40 दिनों में 500 टन सामग्री के साथ बना कर तैयार किया है।

इंडिया टुडे  की खबर में बताया गया है कि पुल का निर्माण उस एक वर्ष में हुआ है जब अग्नि और रोष वाहिनी सैन्य दल कारगिल विजय दिवस के 20 साल मना रहे हैं। 1947-48, 1962, 1971 और 1999 के लद्दाख क्षेत्र में हुए युद्ध के 89 वर्षीय नायक रिटायर्ड नाइक फुंचोक अंगदस ने पुल का उद्घाटन किया।

स्थानीय लोगों ने भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया है। पुल के निर्माण से लोगों की ज़िन्दगी में काफी आराम आया है। लोगो को अब नदी पार करने के लिए मुसीबतों का सामना नहीं करना होगा।

भारतीय सेना ने लेह क्षेत्र के तीन सबसे बड़े गाँव चोगलमसर, स्तोक और चुचोट के स्थानीय लोगों की पुल बनाने की मांग पर यह काम शुरू किया था जिसके बाद सेना ने 40 दिन में इस पुल को बना कर तैयार करदिया।