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खिलौना उद्योग पनपा गलवान घाटी झड़प के बाद, बढ़ी स्वदेश निर्मित खिलौनों की माँग

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और पीएलए की सेना के बीच हुई खूनी झड़प के बाद चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के लिए देशव्यापी अभियान के बीच स्वदेश निर्मित खिलौनों की माँग बढ़ रही है। इसकी वजह से घरेलू खिलौना उद्योग फिर से पनपने लगा है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के राजकोट में खिलौने निर्माताओं ने कहा, “गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से भारतीय उत्पादन की माँग बढ़ी।” अदिति टॉयज के सह-निदेशक सुभास जाला ने कहा, “चीन विरोधी आंदोलन ने इन दिनों लोगों के बीच भारत में निर्मित उत्पादों की माँग बढ़ा दी है।”

अदिति टॉयज के एक अन्य सह-निदेशक अरविंद जाला ने कहा, “चीन से 80-90 प्रतिशत उत्पाद आयात करके देश में खिलौनों की माँग को आमतौर पर पूरा किया जाता था। हालाँकि, गलवान घाटी की घटना के बाद भारतीय वस्तुओं की माँग बढ़ गई है।

अरविंद के हवाले से कहा गया है, “माँग में इस तरह की वृद्धि घरेलू बाजार के विकास के साथ अन्य देशों में निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने का एक मौका है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। हमारी खिलौना कंपनी अगले तीन-चार महीनों में 100 से अधिक उत्पाद बनाने की योजना बना रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “एक वर्ष में हम 200 से अधिक उत्पाद बनाएँगे, ताकि हम भारतीय बाजार की माँग को पूरा कर सकें। भारत में खिलौना उद्यमी बहुत कम है। ऐसे में खिलौना उद्योग देश में एक बड़ी संभावना के रूप में उभर सकता है।”