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दलाई लामा को बधाई देने के बाद रिजिजू को कैबिनेट मंत्री बना चीन को दिया कड़ा संदेश

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलाई लामा को जन्मदिन की बधाई देकर चीन को पहले कड़ा संदेश भेजा। अब विदेश नीति और सुरक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकार ने किरण रिजिजू को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजिंग को एक और स्पष्ट संकेत दिया है।

कानून और न्याय मंत्री के रूप में नियुक्ति के साथ रिजिजू अरुणाचल प्रदेश से पहले कैबिनेट मंत्री बनाए गए। चीन राज्य पर दक्षिण तिब्बत के रूप में दावा करता है। पूर्व में चीन के साथ हुई द्विपक्षीय सुरक्षा बैठक में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रिजिजू की उपस्थिति पर उसने आपत्ति जताई थी। साथ ही इस कदम को सुधारने की बात कही थी।

चीनी विदेश मंत्रालय ने गत वर्ष कहा था कि उसने कभी तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी, जो हमारा दक्षिण तिब्बत क्षेत्र है। सैटेलाइट छवियों से पता चलता है कि वह अरुणाचल के ऊपरी सुबनसिरी में एक गाँव बना रहा है। इस क्षेत्र को उसने 1959 से नियंत्रित किया हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अरुणाचल में चीन की दिलचस्पी तवांग को नियंत्रित करने के कारण है, जो तिब्बत के बाहर तिब्बती बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। चीन को भय है कि दलाई लामा को उनका उत्तराधिकारी तवांग में मिल सकता है, जो छठवें दलाई लामा का जन्मस्थल और तिब्बत के बाहर तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे बड़े मठों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।

विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि किरण रिजिजू की पदोन्नति बीजिंग को संदेश भेजने की मंशा नहीं हो सकती। फिर भी दलाई लामा को मोदी के फोन कॉल के कुछ ही दिनों बाद यह कदम एक संकेत देता है। ये घटनाक्रम तब आया, जब भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में गतिरोध पर चर्चा के लिए 12वें दौर की बैठक करने की तैयारी में हैं।