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कार और गृह ऋण 1 अक्टूबर से होंगे सस्ते, रिज़र्व बैंक ने बैंकों के लिए जारी की अधिसूचना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बुधवार (4 अगस्त) को ब्याज दरों में सुधार के लिए कदम बढ़ाते हुए बैंकों से कहा है कि वे अपनी उधार दरों को खुदरा, व्यक्तिगत और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए अस्थाई रखें। साथ ही यह नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी किए जाएँ।

रिज़र्व बैंक के इस कदम से गृह ऋण और ऑटो ऋण के सस्ते होने की संभावनाएँ हैं क्योंकि हाल ही में रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठकों में लिए गए निर्णय को लागू करने के लिए बैंकों को कई दरों में कटौती करनी होगी।

अपनी अधिसूचना में केंद्रीय बैंक ने कहा है कि 1 अक्टूबर 2019 से व्यवसायिक रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों को व व्यक्तिगत या खुदरा ऋण (आवास, ऑटो, आदि) नई अस्थाई दरों पर निम्नलिखित में से एक बेंचमार्क के अनुसार किया जाना चाहिए-

  • आरबीआई रेपो रेट
  • भारत सरकार के त्रैमासिक ट्रेज़री बिल से प्राप्ति
  • भारत सरकार के छमाही ट्रेज़री बिल से प्राप्ति
  • एफबीआईएल द्वारा कोई और बाज़ारू ब्याज दर

रेपो रेट में बदलाव के सुगम प्रसारण को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पीएसयू बैंकों पर जोर दे रही है कि वे अपने ऋण ब्याज दरों को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ें।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2014 के बाद से रेपो दर में 2.6 प्रतिशत की कमी की है, लेकिन बैंकों ने इस अवधि के दौरान अपने ग्राहकों से दरों में कटौती का लाभ उठाते हुए इस अवधि के दौरान ऋण दरों में सिर्फ 1.1 प्रतिशत की कमी की है।

भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और निजी क्षेत्र के फेडरल बैंक सहित कुछ बैंकों ने पहले ही अपनी ऋण दरों को रेपो दरों के बेंचमार्क के अनुसार कर दिया है, लेकिन कई अन्य बैंक सीमांत लागत के तहत ऋण दर जारी रखी थी।