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स्वेच्छा से पद न त्यागने पर आंध्र सरकार अध्यादेश से भंग कर सकती है तिरुपति बोर्ड

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष पुट्टा सुधाकर यादव, जो कि तेलुगु देसम पार्टी के एक नेता हैं, ने स्वेच्छ से अपना पद त्याने से मना कर दिया है। इसके बाद कार्यकारी अधिकारी (ईओ) अनिल कुमार सिंघल और संयुक्त कार्यकारी अधिकारी (जेईओ) श्रीनिवास राजू से उनका विवाद हुआ, द न्यूज़ मिनट  ने रिपोर्ट किया।

आंध्र प्रदेश में जगन मोगन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआर की नई सरकार बनने के बाद टीटीडी बोर्ड की यह पहली बैठक थी। कुछ वर्तमान सदस्यों को टीडीपी की पिछली सरकार ने नियुक्त किया था। सत्ताधारी सरकार हमेशा की तरह कुछ नए चेहरे लेकर आती है। इसके लिए आंध्र प्रदेश सरकार मंदिर न्यास बोर्ड को भंग करने के लिए अध्यादेश (ऑर्डिनेन्स) ला सकती है।

विश्व के सबसे समृद्ध मंदिर का संचालन टीटीडी करता है जिसमें आईएएस अधिकारी, प्रशासक और राजनेताओं द्वारा नियुक्त सदस्य होते हैं। ये अरचकाओं (पुजारियों) के साथ समन्वय स्थापित कर मंदिर का कार्यान्वयन देखते हैं।

वार्षिक वर्ष 2019-20 में टीटीडी की कुल राजस्व आय के 3,116 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें से 1,231 करोड़ दान और 846 करोड़ रुपये ब्याज से आएँगे। कई बैंकों में मंदिर की 12,000 करोड़ रुपये की राशि जमा है।

अनुमान लगाया जाता है कि 9,000 किलोग्राम जमा सोने पर वार्षिक ब्याज के रूप में टीटीडी को 100 किलोग्राम सोना मिलता है।