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“कश्मीर में 30 साल पहले हुआ आईएसआईएस जैसा आतंक”- कश्मीरी हिंदू सुनंदा वशिष्ठ

1990 में कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुई क्रूरता को याद करते हुए गुरुवार को स्‍तंभकारा सुनंदा वशिष्‍ठ ने मानवाधिकारों पर एक अमेरिकी कांग्रेस पैनल को बताया, “भारत के जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करना मानव अधिकारों की बहाली है।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन में टॉम लैंटोस एचआर कमीशन द्वारा आयोजित सुनवाई में सुनंदा वशिष्ठ ने कहा, “मैं भारत में कश्मीर घाटी से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सदस्य हूँ, जो स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक जातीय हिंसा का शिकार हुए। मैं आज यहाँ इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि मैं वहाँ आतंकियों द्वारा की गई क्रूरत से बचकर निकल गई थी। हालाँकि, अन्य लोग इतने खुशकिस्मत नहीं थे।”

उन्होंने कहा, “एक इंजीनियर, जिसका नाम बीके गंजू था। वह आंतकवादियों के आने पर चावल के एक कंटेनर में छिप गया था। आतंकवादी जब जा रहे थे, तो वह चावल के कंटेनर से निकलकर भागने की फिराक में था लेकिन पड़ोसी ने उसके होने की जानकारी दे दी। इसके बाद आतंकी वापस आए और उन्होंने उसे चावल के कंटेनर में ही गोली मार दी। उसकी पत्नी को पति के खून से लथपथ चावल खाने के लिए मजबूर किया।”

सुनंदा ने कहा, “दुनिया आज देख रही है और हमने 30 साल पहले कश्मीर में आईएसआईएस जैसे आतंक और क्रूरता को देखा है। साथ ही हिंदुओं का कट्टरपंथी इस्लामी आतंक की क्रूरता से भी परिचय कराया गया था।”

उन्होंने कहा, “अनुच्छेद 370, जिसपर दुनियाभर के देशों ने चिंता जताई है, वह वास्तव में मानव अधिकारों की बहाली है। आज मुझे खुशी है कि कश्मीरियों को भारतीय नागरिकों के समान अधिकार हैं। अब कश्मीर के कुछ शेष जिलों में इंटरनेट और फोन सेवा की बहाली बहुत दूर नहीं है। मैं कश्मीर की एक गर्वित बेटी हूँ। आतंकवाद ने मुझे वहाँ से हटा दिया। उम्मीद है कि किसी दिन मेरे मानवाधिकारों की भी बहाली होगी।””