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विश्व भारती विश्वविद्यालय में अवैध भूमि धारकों की सूची में अमर्त्य सेन का भी नाम

नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का नाम अवैध भूखंड धारकों की सूची में आया है। उनका उल्लेख विश्व भारती विश्वविद्यालय द्वारा पश्चिम बंगाल राज्य सरकार को भेजे गए एक पत्र में किया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में विश्वविद्यालय की भूमि पर अनधिकृत रूप से रहने वालों की सूची है। इसमें दावा किया गया है कि इसके दर्जनों भूखंडों को निजी पार्टियों के पक्ष में गलत तरीके से दर्ज करवा दिया गया है।

आरोप है कि सरकार के रिकॉर्ड-ऑफ-राइट (आरओआर) में स्वामित्व की गलत रिकॉर्डिंग के कारण विश्व भारती विश्वविद्यालय की भूमि को अवैध रूप से नामांतरित कर दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप निजी कंपनियों ने रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा खरीदी गई भूमि पर रेस्त्रां, स्कूल और व्यवसाय स्थापित कर दिए हैं।

अमर्त्य सेन के खिलाफ पत्र में कहा गया कि उन्होंने कानूनी रूप से उनके दिवंगत पिता को पट्टे पर दी गई 125 डेसिमल भूमि के अलावा अवैध रूप से 13 डेसिमल भूमि पर भी कब्जा किया हुआ है।

2006 में सेन ने तत्कालीन उप-कुलपति को उनके नाम पर भूमि हस्तांतरित करने के लिए लिखा था। इसे स्वीकृति दे दी गई थी लेकिन अतिरिक्त भूमि विश्वविद्यालय को वापस नहीं की गई थी। एक एस्टेट अधिकार के हवाले से कहा गया, “कैंपस के पास प्लॉट बेचकर सेन परिवार को लाभ होता है। सेन अच्छी तरह से जानते हैं कि वह विश्वविद्यालय की भूमि पर अनाधिकृत रूप से कब्जा कर रहे हैं।”