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श्रीलंका में पाकिस्तान के मुस्लिम शरणार्थियों पर हो रही हिंसा, मांगी मदद

श्रीलंका में हुए आतंकी हमलों के बाद अहमदी मुस्लिम शरणार्थियों को स्थानीय लोगों की हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। ऐसे में उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मदद मांगी है।

श्रीलंका मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी हमलों और सरकारी उत्पीड़न को लेकर पाकिस्तान में अपने घरों से भागने के बाद बड़ी संख्या में अहमदी मुसलमानों ने श्रीलंका में शरण मांगी थी। वर्तमान में वे पासीला और निगंबो में पुनर्वास कॉलोनियों में रहते हैं।

स्थानीय लोगों के हमले और धमकियों के बाद सैकड़ों अहमदी शरणार्थियों ने मस्जिदों और एक पुलिस स्टेशन में शरण ली है। 200 से अधिक अहमदी शरणार्थियों को निगंबो में एक अहमदी मस्जिद में रखा गया है। 500 से अधिक लोगों ने छोटे से शहर पासीला के एक शिविर में शरण मांगी है।

पुलिस और सैनिक निगंबो में मस्जिद की रक्षा कर रहे। वहीं, स्थानीय पुलिस पासीला में निर्माणाधीन अहमदी सांप्रदायिक केंद्र की रखवाली कर रही है। स्थानीय लोगों के हवाले से द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि ईसाइयों ने मुस्लिमों को घरों से निकाल दिया है। उनके घर में तोड़फोड़ की, उन्हें मारा-पीटा और जान से मारने की धमकी दी है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने अहमदियों पर हमलों की पुष्टि करते हुए उन्हें सुरक्षा देने का भी वादा किया है। पासीला अहमदिया मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष हाफ़िज़ अहमद ने पाकिस्तानियों के इस समूह को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मांग की है।

58 साल के तारीक अहमद ने कहा, “पाकिस्तान में लोगों ने हम पर हमला किया और कहा कि हम मुस्लिम नहीं हैं। अब श्रीलंका में लोग हम पर हमला कर रहे हैं क्योंकि वे कहते हैं कि हम मुसलमान हैं।” अहमदियों को 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने दंगों के बाद संवैधानिक संशोधन के तहत गैर-मुस्लिम घोषित किया था।