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कृषि कानून से गुजरात की आलू निर्यात में बढ़ी हिस्सेदारी, चावल में भी बढ़ोतरी की आशा

गुजरात के मेहसाणा क्षेत्र के आलू किसान कृषि कानून से जुड़ी अनुबंध खेती से अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्पादक बन गए हैं। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्था ने इसकी प्रमुख वजह आलू के उन किस्मों की खेती बताई है, जिन्हें प्रसंस्कृत किया जा सकता है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के किसानों की इस खेती की बदौलत देश के कुल आलू उत्पादन में 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सेदारी होने के बाद भी कुल आलू निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत हो गई है।

मेहसाणा के आलू किसानों का कहना है, “उन्हें प्रसंस्कृत किस्मों वाले आलू उगाने की जानकारी फ्रेंच फ्राइज़ बनाने वाली कंपनी से करार के बाद मिली।” इससे गुजरात में लगातार आलू की मांग बढ़ती जा रही है।

राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव के मुताबिक, अनुबंध खेती से चावल के निर्यात में करीब 20 से 30 लाख टन की बढ़ोतरी हो सकती है। निर्यातक किसी भी राज्य के गाँव में जाकर किसानों से खरीद-फरोख्त कर सकेंगे। वे गाँवों में यूनिट लगाने में भी निवेश कर सकते हैं। इससे किसानों को आर्थिक फायदा होगा और निर्यात बढ़ेगा।

ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआइ) के चेयरमैन मोहित सिंगला का कहना है, “नए कृषि कानून के तहत अनुबंध पर खेती करने से भारी मात्रा में उत्पाद की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की नज़र में भारतीय उपज की गुणवत्ता की स्थिति भी सामने आएगी। नए कानून से भारतीय उत्पाद का प्रचार-प्रसार होगा। किसानों को अपनी उपज की कीमत के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।”

कृषि निर्यातकों के मुताबिक, कीटनाशक व अन्य रसायन के उपयोग की वजह से बाहरी देश भारत के कई कृषि उत्पादों की खरीदारी नहीं करते हैं। अनुबंध खेती शुरू होने से किसान यह जान पाएँगे कि उन्हें अपने उत्पादों में किस स्तर के कीटनाशक व रसायन मिलाने हैं।