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गुजरात में किसानों को सशक्त करने के लिए उप्र और मप्र की तरह एपीएमसी में संशोधन

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने सोमवार (11 मई) को राज्य में किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उपज विपणन समितियों के लिए कानून में संशोधन किया।

लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) के एकाधिकार को खत्म कर अब फसलों और पशुओं जैसे गाय, बैल और घोड़ों की खरीद के लिए बाजार में निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है। किसानों को पूरे राज्य में किसी भी एपीएमसी को अपनी फसल बेचने की अनुमति है और किसी को भी बाध्य नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एपीएमसी अधिनियम में इन संशोधनों के साथ गुजरात अब भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में शामिल हो गया है। इसका मकसद किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलना और कृषि बाजारों में सुधार होना है।

राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अध्यादेश के तहत व्यापारियों को अब एपीएमसी को कोई शुल्क अदा किए बिना किसानों से सीधे खरीद करने की अनुमति है। मौजूदा ट्रेडर लाइसेंस अब एकल राज्य व्यापी ट्रेडर लाइसेंस में तब्दील हो जाएँगे, जो उन्हें राज्य के किसी भी एपीएमसी में बेचने की अनुमति देगा।

यह संशोधन राज्य को किसी भी मौजूदा बाजार यार्ड को राष्ट्रीय महत्व (एमएनआई) के रूप में घोषित करने का अधिकार देता है। राज्य एपीएमसी कानून में बदलाव कृषि बाजारों को और उदार बनाने की यह कहकर कोशिश करता है कि वार्षिक टन भार के 30 प्रतिशत से कम न हो या यार्ड में वार्षिक मूल्य दो अन्य राज्यों से कम न हो।