समाचार
अयोध्या भूमि विवाद- पुनर्विचार के बाद अब उपचार याचिका दायर करेगा मुस्लिम पक्ष
आईएएनएस - 16th December 2019

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मामले में मुस्लिम पक्ष ने अब सर्वोच्च न्यायालय से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद उपचार (क्यूरेटिव) याचिका दायर करने का प्रस्ताव रखा है।

उपचार याचिका न्यायालय में शिकायतों के निवारण के लिए उपलब्ध अंतिम न्यायिक सहारा है। इस पर फैसला आमतौर पर जजों के चैंबर में किया जाता है। केवल दुर्लभ मामले होते हैं, जिनमें ऐसी याचिकाओं की खुली अदालत में सुनवाई होती है।

मामले में एक स्वतंत्र वादी जमीयत उलमा-ए-हिंद (जेयूएच) जल्द ही इस पर फैसला लेने के लिए एक बैठक बुलाएगा। अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (एआईबीएमएसी) भी उपचार याचिका की संभावना पर चर्चा कर रही है।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में एआईबीएमएसी के संयोजक और वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, “मैं सर्वोच्च न्यायालय में उपचार याचिका दायर करने के लिए एक आधार का पता लगाने की कोशिश कर रहा हूँ। हम वरिष्ठ वकील राजीव धवन से भी सलाह लेंगे। अगर संभावना दिखी तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से संपर्क किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत ने उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करने पर भी विचार नहीं किया। हमें उम्मीद थी कि सबरीमाला मामले में भी हमारी सुनवाई होगी, जहाँ समीक्षा याचिकाएँ लगी थीं। उपचार याचिका दायर करने की कोई समय सीमा तय नहीं है लेकिन इसमें कम से कम एक महीने का शोध होगा।”

जमीयत उलमा-ए-हिंद के कानूनी सेल सचिव गुलाम अहमद आज़मी ने कहा, “उपचारात्मक याचिका सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदान किया गया एक असाधारण उपाय है। यदि प्राकृतिक न्याय की प्रक्रिया को मान्यता नहीं दी गई है या एक आदेश ने न्यायपालिका में जनता के विश्वास को हिला दिया है तो इन आधारों पर उपचार याचिका दायर की जा सकती है।”