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चीन ने 8 माह बाद चार सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकारी, मरणोपरांत किया सम्मानित

पहली बार आठ महीने बाद गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के दौरान मारे गए पीपल्स लिबरेशन आर्मी के चार जवानों और घायल हुए एक जवान को चीन ने सम्मानित किया।

चीन के मीडिया चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) ने दावा किया कि पाँच पीएलए सैनिकों को मानद उपाधि और प्रथम श्रेणी के मेरिट प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) ने शुक्रवार को घोषणा की कि चार चीनी सैनिक, जो जून 2020 में सीमा पर टकराव के दौरान मारे गए थे, को मरणोपरांत मानद उपाधियों और प्रथम श्रेणी के योग्यता उद्धरणों से सम्मानित किया गया।

देश के मीडिया ने कहा कि सीएमसी ने पहली बार राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्र की रक्षा के लिए उनके बलिदानों को याद करने को शहीदों के नामों और कहानियों का अनावरण किया।

उसने कहा कि चेन होंगुन को राष्ट्रीय क्षेत्र की रक्षा के लिए नायक की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। चेन जियानगॉन्ग, जिओ सियुआन और वांग ज़ुओरन को प्रथम श्रेणी के योग्यता उल्लेख से सम्मानित किया गया।”

आगे कहा गया कि जवानों का नेतृत्व करने वाले एक कर्नल क्यूई फेबाओ झड़प के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। क्यूई को नायक कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

यह बात तब सामने आई है, जब भारतीय सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईसी जोशी ने रूस की एक एजेंसी टीएएसएस के हवाले से दावा किया था कि 15 जून 2020 को 45 चीनी पीएलए सैनिक मारे गए थे। इस संघर्ष में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे, जबकि चीन ने कभी अपने मारे गए सैनिकों की संख्या घोषित नहीं की थी।