समाचार
असम के मुस्लिम क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन पर भाजपा इकाई ने भंग किया अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ

असम में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में मुस्लिमों के वर्चस्व वाली सीटों पर भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। इसके बाद पार्टी इकाई ने इसे भंग कर दिया है।

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने असम में आसानी से चुनावों में 64 सीटों के बहुमत निशान को पार कर लिया था लेकिन पार्टी मुस्लिम सीटों पर भारी अंतर से हार गई थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, “पार्टी को उन क्षेत्रों में बहुत कम वोट मिले हैं, जिनकी हमें उम्मीद थी। यहाँ तक कि बूथ कमेटियों के सदस्यों ने भी भाजपा को वोट नहीं दिया। ऐसे में इस असहयोग को जारी रखने की आवश्यकता नहीं है।”

रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा का लक्ष्य करीब सात सीटें जीतने का था, जहाँ प्रवासी मुस्लिम आबादी बहुमत में है। पार्टी ने सात मुस्लिम-बहुल सीटों से अपने उम्मीदवार उतारे, जिनमें जनिया, जलेश्वर, बागबर, सलमारा दक्षिण और बिलासिपारा पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र, निचले असम, लारीघाट और मध्य असम में रूपोहित और बराक घाटी में सोनाई हैं।

पार्टी ने एक केंद्रित रणनीति अपनाई थी। इसमें बूथ स्तर की जनसभाओं को करना, निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं को लुभाना शामिल था। हालाँकि, कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन ने कथित तौर पर सीएए व एनआरसी कार्ड खेला, जिससे इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का ध्रुवीकरण हो गया।