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एल्गार परिषद मामले में एनआईए का दावा, “देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ना चाहते थे आरोपी”

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने एक विशेष न्यायालय को प्रस्तुत किए अपने आरोप-पत्र के मसौदे में दावा किया कि एल्गार परिषद मामले के आरोपी भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ना चाहते थे और फिर अपनी सरकार स्थापित करना चाहते थे।

एनआईए का यह बयान गत चार वर्षों से भारतीय राजनीति को हिला देने वाले सनसनीखेज मामलों को लेकर गिरफ्तार 16 आरोपियों और छह अन्य भगोड़ों के विरुद्ध दर्ज दोहरे मामलों में दायर आरोप-पत्र के मसौदे में आया है।

आरोप-पत्र का मसौदा एनआईए की विशेष न्यायालय के विशेष न्यायाधीश डीई कोठालीकर के समक्ष गत सप्ताह दोनो मामलों की लंबी जाँच के उपरांत दायर किया गया था।

मसौदा 15 आरोपियों के विरुद्ध 17 आरोप लगाता है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराएँ सम्मिलित हैं।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, आरोप-पत्र में दावा किया गया कि आरोपी का मुख्य उद्देश्य राज्य से सत्ता हथियाने के लिए क्रांति और सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से जनता सरकार (जनता की सरकार) स्थापित करना था।

पुणे में कुख्यात एल्गार परिषद की बैठक के दौरान आरोपी भड़काऊ गाने भी बजा रहे थे और नक्सली साहित्य भी बाँट रहे थे। उन्होंने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जेएनयू और टीआईएसएस जैसे विश्वविद्यालयों के कई छात्रों को भी काम पर रखा था।