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सिंचाई घोटाले में एनसीपी नेता शरद पवार को नागपुर संभाग में एसीबी ने दी क्लीन चिट

उप-मुख्यमंत्री का पद त्यागने के नौ दिन बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता अजित पवार को राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने नागपुर संभाग की सिंचाई परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों में क्लीन चिट दे दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे उच्च न्यायालय में बुधवार को दायर किया गया शपथ-पत्र फडणवीस के त्याग-पत्र के अगले दिन 27 नवंबर को ही तैयार कर लिया गया था। इसमें एसीबी अधीक्षक रश्मि नांदेड़कर ने बताया, “अजित पवार को निष्पादन एजेंसियों के भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि उनका कोई कानूनी कर्तव्य नहीं था। बाकी शेष निविदाओं की जाँच चल रही है।”

देवेंद्र फडणवीस ने एसीबी के हलफनामों पर कहा, “पवार को क्लीन चिट देने के लिए जाँच के निष्कर्षों को बदल दिया गया। मैं 302 निविदाओं में से 100 में जाँच में दायर हलफनामे की सामग्री से सहमत नहीं हूँ। मुझे लगता है कि न्यायालय इसे स्वीकार नहीं करेगा। यह पिछले वर्ष नवंबर में एसीबी के तत्कालीन प्रमुख द्वारा दायर हलफनामे से पूरी तरह से विरोधाभासी है।”

मुख्यमंत्री रहने के दौरान 28 दिसंबर 2014 को देवेंद्र फडणवीस ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए अनुबंधों के आवंटन में अनियमितता और भ्रष्टाचार में कथित भूमिका के लिए पवार और सुनील तटकरे (जल संसाधन मंत्री) के खिलाफ एसीबी को जाँच की अनुमति दी थी।

जाँच अधिकारी डिप्टी एसपी मिलिंद टोट्रे ने बताया, “उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, पवार के खिलाफ लगाए गए विभिन्न आरोपों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगने के बाद नवीनतम हलफनामा दायर किया गया था। पूर्व मंत्री को नागपुर और अमरावती में दर्ज किसी भी प्राथमिकी में आरोपी नहीं बनाया गया है। इस वजह से हमने सरकार से उनके खिलाफ आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा था।” नांदेड़कर ने कहा, “मामले को लेकर पूछताछ और जाँच के दौरान न तो दस्तावेजी और न ही मौखिक साक्ष्य इकट्ठा किए जा सके हैं। “