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केजरीवाल सरकार का शीला सरकार से चार गुना अधिक विज्ञापनों पर खर्च- आरटीआई

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम से मिली जानकारी के अनुसार आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने अपने पहले चार वर्षों में हर साल करीब 78 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए हैं जबकि इसकी तुलना में पिछली शीला दीक्षित सरकार ने 19 करोड़ रुपये सालाना विज्ञापनों पर खर्च किए थे।

आईएएनएस को आरटीआई से सूचित किया गया कि शीला दीक्षित की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने 2008-2012 तक में 75.9 करोड़ रुपये यानी लगभग 18.97 करोड़ रुपये सालाना विज्ञापनों पर खर्च किए हैं।

वहीं अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आप सरकार ने 2015-2019 के बीच 311.78 करोड़ रुपये जो लगभग 77.94 करोड़ रुपये सालाना के हिसाब से यानी करीब कांग्रेस सरकार से चार गुना ज्यादा विज्ञापनों पर खर्च किए हैं।

पर आपको यह भी बता दें कि प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों द्वारा लिया जाने वाला औसत विज्ञापन शुल्क कांग्रेस सरकार के समय की तुलना में 20-40 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

सूचना और प्रचार निदेशालय (डीआईपी) ने आरटीआई आवेदन के जवाब में कहा कि आप सरकार 2015 में सत्ता में आई थी और 2015-16 में विज्ञापनों पर 81.23 करोड़ रुपये वहीं 2016-17 में विज्ञापनों पर 67.25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

दिल्ली सरकार ने 2017-18 में सबसे ज्यादा करीब 117.76 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए जबकि 2018-19 में खर्चा घटकर मात्र 45.54 करोड़ रुपये ही रह गया।

“दिल्ली सरकार ने 31 जुलाई तक में 29.92 करोड़ रुपये खर्च किए हैं”, आरटीआई में कहा। इसमें बाहरी प्रचार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और अन्य प्रमुख के रूप में ‘विज्ञापन और प्रचार’ के तहत शामिल हैं।

शीला दीक्षित सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल (2008-13) में 2008-09 में 24.58 करोड़ रुपये, 2009-10 में 15.35 करोड़ रुपये और 2010-11 में 17.87 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए थे।

गौरतलब है कि 2015 में जब से आप सत्ता में आई है तब से भाजपा दिल्ली सरकार को विज्ञापनों में अत्यधिक खर्चों के लिए घेरती रही है।

(आईएएनएस के समाचार से)