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5जी नेटवर्क के लिए वायु तरंगों को रक्षा मंत्रालय व इसरो के खाली करने की संभावना

रक्षा मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग ने 3,300-3,600 मेगाहर्ट्ज बैंड में वायु तरंगों को खाली करने पर सहमति व्यक्त की है, जिसका उपयोग 5जी नेटवर्क द्वारा किया जाएगा।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह विकास दूरसंचार विभाग की ओर से आता है और दो पूर्वोक्त मंत्रालयों ने 5जी वायु तरंगों पर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का निपटारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग के 3,300-3,600 मेगाहर्ट्ज रेंज में 125 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खाली करने की संभावना है।

एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, “गत कुछ सप्ताहों में अंतर-मंत्रालयी बैठकें हुईं और 3,300-3,600 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम में 125 इकाइयों को रखने वाले दोनों विभागों को इसे खाली करने की संभावना है।”

गौर करना चाहिए कि रक्षा मंत्रालय वर्तमान में 3,300-3,400 मेगाहर्ट्ज बैंड का उपयोग कर रहा है, जबकि 3,400-3,425 मेगाहर्ट्ज बैंड इसरो के पास है। इसरो ने मांग की कि उसके सैटेलाइट हब से लगभग 10 किमी के दायरे में 5जी टेलीकॉम टॉवर तैनात न हो। दरअसल, वह कथित तौर पर 5जी संकेतों की वजह से सैटेलाइट हब को हस्तक्षेप से बचाना चाहती है।

डॉट का उद्देश्य बिक्री के लिए 300 मेगाहर्ट्ज की वायु तरंगों के सुगम दूरसंचार ऑपरेटरों द्वारा निर्बाध 5जी सेवाओं को सक्षम करना है। विभाग ने पूर्व में रक्षा मंत्रालय और इसरो से 125 मेगाहर्ट्ज की वायु तरंगों को खाली करने का आग्रह किया और मंत्रालय को 3,000-3,100 मेगाहर्ट्ज का उपयोग करने का सुझाव दिया था।

यह विकास तब आया, जब सरकार ने गत वर्ष विवादास्पद अंतर मंत्रालयी स्पेक्ट्रम संबंधित मुद्दों को हल करने को एक समिति बनाई। 125 मेगाहर्ट्ज की वायु तरंगों को मुक्त करने से दूरसंचार विभाग के लिए 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी का मार्ग खुल जाएगा।