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भारत में 5जी- दूरसंचार कंपनियाँ सरकार से चाहती हैं स्पेक्ट्रम और वित्तीय सहायता

पांचवीं पीढ़ी (5जी) तकनीक के मैदानी परीक्षणों को शुरू करने हेतु स्मार्टफोन कंपनियों ने सरकार से व्यापक सहायता की मांग की है जिसमें वित्तीय सहायता, बैंड स्पेक्ट्रम और दूरसंचार उपकरणों के आयात को शुल्क-मुक्त करना शामिल है, इकोनॉमिक टाइम्स  की रिपोर्ट में बताया गया।

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (कोआई) ने दूरसंचार विभाग को पत्र लिखकर सेवा प्रदाताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने को कहा है। इसके अलावा एसोसिएशन यह भी चाहती है कि दूरसंचार विभाग अनुमतियाँ दे और नेटवर्क उपकरण खरीदी हेतु शुल्क माफ कर दे।

दूरसंचार विभाग ने पहले ही टेलीकॉम ऑपरेटरों और नेटवर्क विक्रेताओं को 5जी आधारित पायलटों को शुरू करने और 2019 की शुरुआत में भारतकेंद्रित उपयोग के मामलों को दिखाने के लिए आमंत्रित किया है। सरकार उम्मीद कर रही है कि व्यावसायिक 5जी सेवाओं को 2020 में पेश किया जाएगा।

जबकि दूरसंचार विभाग की वायरलेस प्लानिंग विंग ने कहा कि वर्तमान नियमों के अनुसार 5जी ट्रायल के लिए नि: शुल्क स्पेक्ट्रम केवल 90 दिनों के लिए आवंटित किया जा सकता है। टेलीकॉम और उपकरण विक्रेताओं का मानना ​​है कि उन्हें फील्ड ट्रायल पूरा करने के लिए एक वर्ष की आवश्यकता होगी।

सात पेज के पत्र में कोआई के महानिदेशक रंजन एस मैथ्यूज़ ने कहा कि ऑपरेटरों को पहल करने के लिए सभी आवश्यक मंजूरी के लिए एकल बिंदु संपर्क के साथ अकेले मूल उपकरण निर्माताओं का चयन करने की अनुमति देने की आवश्यकता है।

एसोसिएशन यह भी चाहता है कि दूरसंचार विभाग 26 देशों में 26 गीगाहर्ट्ज और 28 गीगाहर्ट्ज  मिलीमीटर वेव स्पेक्ट्रम बैंड के साथ सी बैंड (3300 मेगाहर्ट्ज -3600 मेगाहर्ट्ज) और 1800 मेगाहर्ट्ज की उपलब्धता की पुष्टि करें जिनका प्रयोग बाकि देशों में  5जी सेवाएँ शुरू करने हेतु किया जाता है।

“परीक्षण अवधि के लिए परीक्षण ग्राहकों की संख्या दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और उपकरण निर्माताओं के बीच समझौते पर आधारित होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।