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500 रेस्तरां ने भोजन डिलिवरी कंपनियों का किया विरोध, एकाधिकार और छूट वजह

500 लघु और मध्यम स्तर के रेस्तरां व्यापारियों ने मिलकर एक ऑनलाइन याचिका दायर की है जिसके प्रभाव के कारण भारतीय स्पर्धा आयोग (सीसीआई) और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) स्विगि, ज़ोमैटो, उबर ईट्स और फूडपांडा जैसी भोजन डिलिवर करने वाली कंपनियों पर कार्यवाही करेंगे। इनपर आरोप है कि ये कंपनियाँ अपने प्रभाव का गलत उपयोग कर बाज़ार को एकाधिकृत कर रही हैं, द इकोनॉमिक टाइम्स  ने रिपोर्ट किया।

याचिका में कहा गया कि इन कंपनियों द्वारा भारी छूट दी जाती है। ये आंतरिक सोर्सिंग और स्वयं के भोजनालयों के प्रति लोगों को अकर्षित कर छोटे रेस्तरां का बाज़ार से खात्मा कर रहे हैं।

“रिटेल की तरह रेस्तरां व्यापार या भोजन सेवा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है।”, भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ के अध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया। उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख चार कंपनियों के साथ अगले सप्ताह एक बैठक निर्धारित की गई है जहाँ इन मुद्दों पर चर्चा होगी।

याचिका में माँग की गई है कि सीसीआई “इन कंपनियों के अरक्षणीय मूल्यों पर रोक लगाए, डिलिवरी कंपनी का किसी रेस्तरां पर स्वामित्व या उसमें भागीदारी न हो और फूड नियमकों को नियुक्त करे जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके की प्रतिस्पर्धा के चलते िन नियमों का उल्लंघन न हो।”

स्विगि का द बोल कंपनी नामक एक रेस्तरां है और ज़ोमैटो की हाइपर प्योर नामक किराना आपूर्ति कंपनी है। स्लिगि पर आरोप है कि यह अवैध तरीके से मांग को अपने भोजनालय की तरफ केंद्रित करता है जबकि ज़ोमैटो पर आरोप है कि यह रेस्तरां व्यापारियों को अपने स्टोर से सामान खरीदने पर विवश करता है। ये कंपीटीशन्स अधिनियम का उल्लंघन है।