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विकास दुबे के पाँच और साथियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण की याचिका दाखिल की

कानपुर के बिकरू कांड में विकास दुबे के पाँच और साथियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण की याचिका दाखिल की है। ये सभी आरोपी दो जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करके फरार हैं।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित डेढ़ महीने से इधर-उधर भागकर छिप रहे हैं। आत्मसमर्पण की याचिका दाखिल करने वालों का एसटीएफ और पुलिस कोई पता नहीं लगा पा रही है।

सीओ बिल्हौर संतोष सिंह ने बताया कि विकास दुबे का भान्जा शिव तिवारी, गोविंद सैनी, हीरू, जिलेदार और शिवम दुबे उर्फ बीडीसी ने कानपुर देहात न्यायालय में आत्मसमर्पण की याचिका दाखिल की। न्यायालय से सभी फरार आरोपितों के संबंध में थाने से जानकारी मांगी है।

प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय के पिता राजेंद्र ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। बताया जा रहा है कि बिकरू कांड के दौरान पिता-पुत्र विकास दुबे के इशारे पर अपनी छत से गोलियाँ चला रहे थे। राजेंद्र पिस्तौल तो प्रभात सेमी ऑटोमेटिक राइफल से फायरिंग कर रहा था। एसपी ग्रामीण के मुताबिक, प्रभात को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था।

इसके बाद राजेंद्र को शिवराजपुर रोड पर गंगोत्री रॉयल पशु आहार फैक्टरी के पास से पकड़ा गया था। राजेंद्र ने पूछताछ में बताया कि विकास ने उसे पुलिस पर फायर करने के लिए पिस्तौल दी थी। बाद में वह विकास को पिस्तौल देकर भाग गया था। वह शिवली के साथ औरैया, इटावा समेत अन्य जिलों में छिपा रहा। सरेंडर करने के लिए दो भैंस बेचकर पत्नी से उसने रुपये मंगाए थे। इससे पहले ही पुलिस ने उसे दबोच लिया था।

राजेंद्र ने बताया कि विकास ने पुलिस पर हमले के लिए पाँच टीमें बनाई थीं। उसने एक से लेकर पाँच तक अलग-अलग नंबर देकर छातों पर हमले के लिए उन्हें तैयार कर दिया था।