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एनआरसी-सीएए का डाटा लेने आईं समझकर कोटा, बंगाल में दो महिलाओं पर हमला

एनआरसी-सीएए विषयों पर लोगों को सरकार के मंत्रियों और खुद प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं जिसका खामियाजा दो महिलाओं को भुगतना पड़ा, अमर उजाला  ने रिपोर्ट किया।

राजस्थान के कोटा के बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण के लिए आँकड़े इकट्ठा करने वाली नजीरान बानो को एनआरसी-सीएए के लिए आँकड़े इकट्ठा करने वाली समझकर भीड़ ने उनपर हमला कर दिया। इस घटना के लिए बाद में पुलिस ने एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है।

भीड़ को जब बताया कि वह भी उनकी तरह मुस्लिम है तब जाकर उन्हें छोड़ा गया। हालाँकि इसके पहले उन्हें खुद को मुस्लिम साबित करने के लिए क़ुरान की आयत सुनाने के लिए कहा गया जिसका जवाब उन्होंने पर्स से आयत-अल-कुर्सी का कार्ड दिखाकर दिया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार एसएचओ महेश सिंह ने बताया कि भीड़ ने महिला का मोबाइल छीनकर उसमें एक ऐप पर मौजूद आर्थिक जनगणना के आँकड़ों को डिलीट कर दिया।

पत्रकारों से बातचीत कर बानो ने बताया कि बृजधाम क्षेत्र के निवासियों ने शुरुआत में आवश्यक आँकड़े दे दिए थे लेकिन बाद में परिवारों ने उन्हें बुलाया और कहा कि वह सारे आँकड़ों को डिलीट कर दें क्योंकि वह परिवार की किसी भी जानकारी को साझा नहीं करना चाहते हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल में गूगल इंडिया और टाटा ट्रस्ट के सहयोगी के लिए काम करने वाली 20 वर्षीय चमकी खातून भी गलतफहमी का शिकार हुईं कि वे एनआरसी के लिए डाटा इकट्ठा कर रही हैं जिस कारण गाँववालों ने उनपर हमला कर दिया।

गौरबाजार गाँव में स्थित खातून के घर को गाँववालों ने आग के हवाले कर दिया और उनके परिवार को मजबूरी में स्थानीय पुलिस थाने में शरण लेनी पड़ी। इस मामले में फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।