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म्यांमार ने अजीत डोभाल द्वारा संचालित अभियान में भारत कौ सौंपे 22 विद्रोही

म्यांमार की सेना ने शुक्रवार (15 मई) को मणिपुर और असम के 22 पूर्वोत्तर विद्रोहियों को सौंप दिया है, जिन्हें भारत बहुत दिनों से अपनी गिरफ्त में लेना चाहता था। इस कदम के साथ ही म्यांमार और भारत के बीच संबंध और भी गहरे हो गए हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल द्वारा यह अभियान संचालित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप विद्रोहियों को एक विशेष विमान से भारत लाया गया। विमान पहले मणिपुर की राजधानी इम्फाल पहुँचा, जहां कुछ विद्रोहियों को सौंपा गया। इसके बाद असम के गुवाहाटी आया, जहाँ विद्रोहियों को पुलिस प्रशासन को सौंपा गया।

रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया, “इस कदम को बहुत सकारात्मक तरीके से देखा जा रहा है। यह पहला मौका है, जब म्यामांर ने पूर्वोत्तर विद्रोही समूहों के नेताओं के प्रत्यर्पण के लिए भारत के अनुरोध पर कार्रवाई की है। अभियान की सफलता का श्रेय दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रही खुफिया जानकारी और रक्षा सहयोग को दिया जा रहा है।”

म्यांमार से जिन 22 विद्रोहियों को भारत लाया गया है, उनमें से 12 मणिपुर के चार विद्रोही समूहों जैसे यूएनएलएफ, प्रीपाक (प्रो), केवाईकेएल और पीएलआई से जुड़े हुए हैं। वहीं, 10 अन्य असम आधारित विद्रोही समूहों एनडीएफबी (एस) और केएलओ से जुड़े हुए हैं।

वापस लाए जाने वाले विद्रोहियों में राजन डिमरी शामिल है, जो एनडीएफबी (एस) का प्रमुख है, जिसने खुद को गृह सचिव घोषित किया था। यह बहुत पहले से अधिकारियों की मोस्ट वॉन्टेड सूची में था। अन्य वांछित नेताओं को भी वापस लाया गया है, जिसमें यूएनएलएफ के कप्तान सनतोम्बा निंगहोऊजामा और प्रीपाक (प्रो) के लेफ्टिनेंट पशुराम लैशराम शामिल हैं।