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पाकिस्तान से 200 हिंदू धार्मिक उत्पीड़न के बाद भारत आए, मांगी देश की नागरिकता

अटारी वाघा बॉर्डर से लगभग 200 पाकिस्तानी हिंदू भारत आ गए। पुणे मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि उनमें से कई यात्री वापस पड़ोसी देश जाना नहीं चाहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के हिंदू शरणार्थी आगंतुक विजिटर वीजा पर भारत आए हैं। उनमें से कुछ ने कथित तौर पर दावा किया है कि वे धार्मिक उत्पीड़न की वजह से वहाँ असुरक्षित महसूस कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि सीएए लागू होने के बाद भारत में नागरिकता मिल जाएगी।

अकाली नेता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा उस वक्त सीमा पर थे, जहाँ उनसे चार परिवार मिले। उन्होंने कहा, “वह गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे और पीड़ितों को भारतीय नागरिकता देने का अनुरोध करेंगे।”

बॉर्डर के एक अधिकारी ने कहा, “सीएए लागू होने के बाद पाकिस्तान से हिंदू यात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। भारत आने वाले अधिकांश हिंदू सिंध और कराची प्रांत के थे, जहाँ हिंदू और सिख लड़कियों का अपहरण कर इस्लाम में धर्मांतरण हो रहा है।”

एक महिला ने कहा, “हम पाकिस्तान में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हमारी लड़कियाँ डरी हैं कि कट्टरपंथी उनका किसी भी समय अपहरण कर सकते हैं। पुलिस भी कुछ नहीं करती है। हमारी लड़कियाँ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम इलाके में स्वतंत्र रूप से चल नहीं सकती हैं।”

इससे पूर्व, पिछले साल होली की पूर्व संध्या पर पाकिस्तान के सिंध में दो किशोर हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसमें एक स्वतंत्र पत्रकार ने पीड़िताओं का वीडियो साझा किया था, जिसमें लड़कियाँ रोते हुए कह रही थीं कि कट्टरपंथी कैसे परिवार के लोगों के सामने उन्हें परेशान करते हैं और उनके साथ गलत हरकतें करने की कोशिश करते हैं।