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किसान आंदोलन से दिल्ली-हरियाणा सीमा के 1800 कारखानों पर पड़ा प्रतिकूल प्रभाव

दिल्ली में सिंघू सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन ने ग्रेटर कुंडिल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित लगभग 1800 कारखानों पर बुरा असर डाला है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलनकारी किसानों के सड़क अवरुद्ध करने से क्षेत्र में माल की आवाजाही बाधित है। कपड़ा, इस्पात व अन्य निर्यात वस्तुओं से संबंधित कई कोल्ड स्टोरेज और औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

रितेश बजाज के पास ड्राई फ्रूट्स को प्रोसेस करने और दिल्ली के थोक बाज़ार में बेचने का कारोबार है। वह कुंडली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। बजाज ने रिपोर्ट में कहा, “हम अखरोट, बादाम, अंजीर और सूखे अंगूर आयात करते हैं। अवरोध के कारण माल कोल्ड स्टोरेज में सड़ रहा है।”

कारखाने के मालिक अपने कर्मचारियों को वैकल्पिक दिनों में काम करने को कह रहे हैं क्योंकि उनका आंदोलन के कारण इकाइयों में जाना मुश्किल हो गया है। आजादपुर मंडी को माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। क्षेत्र में 300 कोल्ड स्टोरेज हैं। उनमें से बहुत से उत्पादों और सामानों की आवाजाही न होने के कारण वे अधिकतम क्षमता पर हैं।

केले के व्यापारी कहते हैं, “मेरे ट्रक चार अलग-अलग जगहों पर फंसे हैं। चूँकि, केले आसानी से खराब होने लगते हैं। इस वजह से जहाँ भी ट्रक फंसते हैं, मुझे वहाँ केले सस्ते दामों पर बेचने पड़ते हैं।

कपड़ा इकाई के मालिक सतनाम सिंह ने दावा किया कि यदि किसान आंदोलन जारी रहता है तो उत्पादों की डिलीवरी न होने और श्रमिकों का बकाया भुगतान न करने का चक्र जारी रहेगा। ऐसी स्थिति बनी रहती है तो कारखानों को चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसका असर इस औद्योगिक गलियारे में काम करने वाले 25,000 श्रमिकों पर पड़ेगा। यदि व्यवसाय बंद हो जाता है तो उनके वेतन का भुगतान करना मुश्किल होगा। माल गोदामों में सड़ रहा है।